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डॉ. अजय पाठक

मूल नाम :डॉ. अजय पाठक

चौदह जनवरी उन्नीस सौ साठ बलिया उत्तरप्रदेश में जन्म |

पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक, प्राणीशास्त्र, हिन्दी साहित्य, समाजशास्त्र, भारतीय इतिहास में स्नातकोत्तर, इतिहास में डाक्टोरेट । अब तक सत्रह गीत संग्रहों के अलावा 'मुगलकाल में शिक्षा साहित्य एवं ललित कला', तथा कवि हरिवंशराय बच्चन की लोकप्रिय कृति 'मधुशाला' के दर्शन पर आधारित कृति 'तेरी मेरी मधुशाला' और 'पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल एवं उनका साहित्यिक अवदान' और श्रीमद्भगवद्गीता का संपूर्ण काव्यानुवाद, 'सुनो धनंजय' प्रकाशित ।

काव्य संग्रह 'मंजरी' एवं छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि गीत-कवियों के संग्रह 'छत्तीसगढ़ के सरस स्वर' सहित देश के स्थापित तथा उदीयमान नवगीतकारों के संकलन 'सापेक्ष-56' का संपादन। देश के अनेक प्रतिनिधि संकलनों एवं वेब पत्रिकाओं में रचनाओं का समावेश, जंगल एवं प्रकृति सहित सामाजिक विसंगतियों, गरीबी, अभाव, नैतिक मूल्यों का हास, भारतीय दर्शन तथा राजनैतिक अधोपतन पर प्रहार करती इनकी छंदबद्ध रचनाएँ अत्यन्त सराही जाती है।

कहानी, उपन्यास व्यंग्य लेखन, निबंध लेखन में भी समान अधिकार, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर रचनाएं प्रसारित, छत्तीसगढ़ी, पंजाबी और अंग्रेजी में अनेक कविताओं का अनुवाद ।

आडियो एवं वीडियो एलबम्स में गीतों का समावेश साहित्यिक उपलब्धियों के लिये देश एवं प्रदेश के विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित ।

गीत संग्रह 'जंगल एक गीत है' को भारत सरकार का प्रतिष्ठित 'मेदिनी पुरस्कार' प्राप्त। साहित्य पत्रिका : 'नये पाठक' के संपादक।

सम्प्रति : छत्तीसगढ़ शासन के विधिक मापविज्ञान के विभाग प्रमुख के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पश्चात स्वतंत्र लेखन।

वीडियो संग्रह

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